Saturday, September 4, 2010
कश्मीर में ग्रीष्मकालीन स्कूल का आयोजन
स्थानीय आध्यात्मिक सभा श्रीनगर द्वारा 25 से 27 जून 2010 तक ग्रीष्मकालीन स्कूल का आयोजन किया। यह ग्रीष्मकालीन स्कूल कश्मीर के प्रथम बहाई स्वर्गीय मोलवी अब्दुल्ला वकील को समर्पित था। इसमें 30 से अधिक बहाई मित्रों और जिज्ञासुओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित मित्रों ने रिज़वान संदेश 2010 का अध्ययन किया और बहाई कोष, मानव का स्थान तथा पूर्व बहाइयों के जीवन इतिहास जैसे विषयों पर चर्चा भी की गई।
Posted by bhartiya-bahai at 2:48 AM 0 comments
पटना में सामुदायिक विद्यालयों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
सामुदायिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत बहाई प्रेरित संस्थान 'सोल' द्वारा सामुदायिक विद्यालयों की स्थापना के लिए 5 मई से 19 जून तक पटना में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मणिपुर, पश्चिम बंगाल, बिहार एवं छत्ताीसगढ़ के 13 बहाई मित्र शामिल हुए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सकारात्मक विद्यालय की अवधारणा और शिक्षक की अभिवृत्तिा तथा गुणों के संदर्भ में गहन अध्ययन किया गया। इसके अतिरिक्त पूर्व प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को पढ़ाये जाने वाले पाठयक्रमों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों को शिक्षण अभ्यास के लिए सोल द्वारा संचालित 'चिल्ड्रन गार्डन' सामुदायिक विद्यालय ले जाया गया, जहां प्रशिक्षु शिक्षकों ने व्यावहारिक रूप से शिक्षण की सीख प्राप्त की। इस कार्यक्रम में मणिपुर की सुश्री मचासना कोईजाम,
डॉ0 टोम्बा, पं0 बंगाल के श्री श्यामल महतो एवं छत्तीसगढ़ के श्री शिव कुमार साहु ने रिर्सोस पर्सन के रूप में शामिल होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा अन्य 9 मित्रों ने सामुदायिक विद्यालय के शिक्षक का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
डेढ़ मास तक चले इस कार्यक्रम का संचालन सोल के कार्यक्रम संयोजक श्री संदीप कुमार मल्लिक ने किया। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर परिषद् के सचिव श्री अम्बरीष कश्यप, सहायक मंडल सदस्य श्री रजनीश सिंह तथा राहुल कुमार एवं परिषद् के सदस्य श्री दीपेन्द्र कुमार चन्दन भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण के समापन के उपरान्त सभी रिर्सोस पर्सन एवं प्रशिक्षु शिक्षक ने पूरे उत्साह एवं निष्ठा के साथ अपने-अपने समुदायसमूहों में सामुदायिक विद्यालय की स्थापना कर सभ्यता के नवनिर्माण का आश्वासन दिया।
Posted by bhartiya-bahai at 2:46 AM 0 comments
डॉ. बद्री प्रसाद पटेल
बड़े दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि स्थानीय बहाई आध्यात्मिक सभा-ब्यौहरा (रीवा), मध्यप्रदेश के सचिव डॉ. बद्री प्रसाद पटेल का 5 जुलाई 2010 को आकस्मिक निधन हो गया। स्थानीय सभा के तत्वावधान में 12 जुलाई को ब्यौहरा में उनकी स्मृति में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उनको श्रध्दांजलि अर्पित की गई और उपस्थित मित्रों ने आभा लोक में उनकी आत्मा की प्रगति के लिए ईश्वर से प्रार्थनाएँ कीं। इस अवसर पर कई स्थानीय सभाओं के सदस्यों के अतिरिक्त परिवारजन व मित्रगण भी उपस्थित हुए। डॉ. बद्री प्रसाद पटेल, बहाउल्लाह के समर्पित सेवक में से एक थे, उनके प्रयासों से क्षेत्र के अनेक लोगों तक प्रभुधर्म का संदेश पहुँचा।
Posted by bhartiya-bahai at 2:44 AM 0 comments
Wednesday, August 18, 2010
Gujarat’s Godhra to have India’s second Lotus temple
Vadodara, DeshGujarat, 17 August, 2010
Guajrat’s Ghodhra will have second lotus temple of India. The existing lotus temple is in Delhi, well known as Bahai temple.
Godhra’s proposed Pusthidham Mandir will be constructed in lotus temple shape. Ground breaking ceremony of this proposed structure will be held on 19 August at Godhra’s Bamroli road by Vaishnav sect Acharya Shri Dwarkeshlalji Maharaj.
Addressing a press conference in Vadodara Shri Dwarkeshlalji said Godhra is actually Gau-dhara, meaning a land of cows. He said the proposed Pushtidham will come up over 3.5 lakh square ft area by Jayantilal Chand Charitable Trust. A temple shaped two-storey structure will stand amid newly developed lake. Shrinathji’s murthy will be installed on the ground floor. Shri Kalyanray Prabhu will be there in Shrinathji’s lap.
Moreover there will be a garden, library, guest house, exhibition showcasing Pushtimarg’s 535 years history, Panchamahal district’s history and culture.
http://deshgujarat.com/2010/08/17/gujarats-godhra-to-have-indias-second-lotus-temple/
Posted by bhartiya-bahai at 3:53 AM 0 comments
Saturday, July 17, 2010
बाब की समाधि का जीर्णोध्दार
विश्व केन्द्र से प्राप्त समाचार के अनुसार बाब की समाधि के गुम्बद पर लगाये गये सुनहले टाइल्स को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुर्तगाल के एक टाइल्स निर्माता के साथ हाल ही अनुबन्ध किया गया है कि वह ग्यारह हज़ार ऐसे टाइल्स सप्लाई करेगा जो गुम्बद के ऊपरी हिस्से पर चारों ओर लगाये जायेंगे। अभी जो टाइल्स लगे हैं वे साठ साल पुराने हो चुके हैं और धीरे- धीरे अपनी चमक खोते जा रहे हैं। अनुबंधित कम्पनी की प्रयोगशाला में गहन प्रयोग और छानबीन के बाद जैसे टाइल्स को लगाने का निर्णय लिया गया है, उसके सम्बन्ध में अनुमान लगाया जाता है कि इसकी चमक दो सौ सालों तक बनी रहेगी। पुरानी मिट्टी के टाइल्स के स्थान पर अब जो टाइल्स बनाये जा रहे हैं वो चीनी मिट्टी के होंगे और सत्तार प्रकार और आकार के बनाये टाइस में से चुनाव किया जायेगा। कम्प्यूटर संचालित भट्टी में 1,400 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इस चीनी मिट्टी पर सोने का पानी चढ़ाकर इसको स्वर्णिम रंगरूप प्रदान किया जायेगा और टाइल्स की मजबूती और रंग-रूप का पूरा-पूरा ध्यान रखते हुए चयन किये गये टाइल्स के एक-एक पीस को पैक कर हाइफा लाया जायेगा। सितम्बर तक इन टाइल्स का पहला कॉन्साइन्मेंट पवित्र भूमि पहुँच जाने की उम्मीद है। इस प्रकार धर्मसंरक्षक द्वारा इस पवित्र स्थल के गौरव को बनाये रखने का जो सपना देख गया था वह पूरा होगा। पुराने टाइल्स में केवल एक टाइल रखा जायेगा जिसे धर्मसंरक्षक ने खुद अपने हाथों से रखा था। यह टुकड़ा माहकू के उस कैदखाने का है जहाँ प्रभुधर्म के शहीद अग्रदूत कभी कैद किये गये थे।
Posted by bhartiya-bahai at 3:17 AM 1 comments
असम राज्य की गतिविधियाँ
गुवाहाटी के बहाई भवन में 6 जून 2010 को स्थानीय आध्यात्मिक सभाओं के कोषाध्यक्षों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 9 स्थानीय आध्यात्मिक सभा के क्षेत्रों से 20 मित्रों ने भाग लिया। इस सत्र के दौरान मित्रों ने बहाउल्लाह और अब्दुल-बहा के लेखों से चुने हुए उध्दरणों का अध्ययन किया और विभिन्न बहाई कोषों में योगदान और हुकूकुल्लाह के भुगतान पर शोगी एफेंदी के अनुच्छेद तथा विश्व न्याय मन्दिर के पत्रों का भी अध्ययन किया। श्री इबोम्चा मितई ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया, श्री एच. एन. दास ने रिज़वान संदेश 2010 पर प्रकाश डाला और श्रीमती वनिता दीवान ने हुकूकुल्लाह के भुगतान पर चर्चा की। अनुयायियों और संस्थानों के साथ कोषाध्यक्ष की भूमिका पर चार समूहों में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। श्री एम. केदीवान की पहल से सभी प्रतिभागियों ने परामर्श और समूह चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया। यह बहुत ही रोचक था कि चाय और भोजन विराम की अल्पावधि में भी मित्रगण एक-दूसरे के साथ कोष में योगदान के महत्व के विषय में चर्चा करते थे। श्री भास्कर डेका, श्री कमल सरमा और श्री इबोम्चा मितई के प्रयासों से यह कार्यक्रम सफल बना। रिज़वान संदेश 2010 को बेहतर ढंग से समझने के लिए श्री एच. एन. दास ने असमी भाषा में अनुवाद किया। इस अवसर पर सहायक मण्डल सदस्य श्री संजीब सरमा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में मित्रों ने निर्णय लिया कि वह संबंधित क्षेत्रों में भी अनुयायियों को कोष में दान देने के लिए शिक्षित करेंगे और इस बात का भरसक प्रयास करेंगे की सभी राज्य और क्षेत्रीय गति- विधियाँ पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बने।
क्षेत्रीय बहाई परिषद, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय एवं नगालैंड द्वारा गोवाहाटी के बहाई भवन में 13 जून 2010 को विशेष रूप से नई गठित स्थानीय सभाओं के सचिवों और अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 12 स्थानीय आध्यात्मिक सभाओं से 23 मित्रों ने भाग लिया। मित्रों ने समूहों में विभाजित होकर बहाउल्लाह, अब्दुलबहा, शोगी एफेंदी और विश्व न्याय मन्दिर के चुने हुए लेखों का अध्ययन किया। इस अध्ययन से उन्हें इन दिव्य संस्थानों की भूमिका एवं स्थान और वर्तमान पाँच वर्षीय योजना में इसकी अहम भूमिका के बारे में आवश्यक अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई। मुकेश दीवान द्वारा तैयार की गई पावर प्वायंट प्रजेंटेशन की सहायता से, कैसे बैठक आयोजित करें, मिनिट्स बनाये और विशेष रूप से सभा के अध्यक्ष और सचिव के दायित्वों पर भी चर्चा हुई, जबकि डॉ. बी. आर. पांडा ने स्थानीय आध्यात्मिक सभाओं के इतिहास के विषय में संक्षिप्त में बताया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक मण्डल सदस्यों का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ।
Posted by bhartiya-bahai at 3:14 AM 0 comments
Thursday, June 17, 2010
गजुरात में संस्थान अभियान और बाल मेले का आयोजन
गारखड़ी गुजरात के तेजी से उभरते हुए समुदायसमूहों में से एक है और सघन विकास कार्यक्रम के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए समुदायसमूह के मित्रगण एकजुट होकर संस्थान अभियान और मूल गतिविधियों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में इस समुदायसमूह द्वारा रूही पुस्तक-7 के स्नातकों की संख्या में बढ़ोत्तारी के लिए एक संस्थान अभियान का आयोजन किया गया, जिसके कारण बहुत से क्षमतावान टयूटरों की संख्या में वृध्दि हुई। 22 अप्रैल से 7 मई 2010 तक गांधी नगर में आयोजित इस अभियान में 20 मित्रों ने भाग लिया, जिन्होंने विभिन्न संस्थान पाठयक्रमों को पूरा किया और मानवजाति की सेवा के लिए आवश्यक कौशल, दृष्टिकोण और ज्ञान प्राप्त किया। इस अभियान के परिणामस्वरूप मूल गतिविधियों में पाँच नई भक्तिपरक बैठकें, तीन बच्चों की बहाई कक्षायें और तीन स्टडी सर्कल को जोड़ा जायेगा। सहायक मण्डल सदस्य श्री जितेन्द्र एस. बागुल के पूर्ण सहयोग और सानिघ्य तथा होमफ्रंट पायनीयर श्री किशोर पवार की सहायता से नवम्बर 2009 से इस समुदायसमूह में व्यवस्थित प्रयास स्थान ले रहे हैं। इस समुदायसमूह में ग्रहण- शीलता का पूरा लाभ उठाने के लिए एक अन्य होमफ्रंट पायनीयर श्री विजय गावित की सेवायें ली गईं और तब से यहाँ गतिविधियों संवेग प्राप्त कर रही हैं और मित्रों के उत्साह में वृध्दि हो रही है जैसे-जैसे वह संस्थान अभियानों के दौरान विकसित नये कौशल को व्यवस्थित ढंग से अपने प्रयासों में अपना रहे हैं। इसके परिणाम- स्वरूप, इस समुदायसमूह में मानव संसाधनों में वृध्दि हुई और मूल गतिविधियाँ भी बढ़ रही हैं। यह आशा की जाती है कि गारखड़ी समुदायसमूह जल्द ही उस स्तर पर पहुँच जायेगा जब सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ कर सकते हैं। वर्तमान में यहाँ 57 रूही पुस्तक-1 के स्नातकों में से 10 मित्रों ने पाठयक्रमों की पूर्ण श्रृंखला को पूरा कर लिया है और विकास प्रक्रिया के विस्तार में लग रहे हैं।
गुजरात के अहवा समुदायसमूह ने भिस्या, डांग में 15 मई 2010 को बच्चों के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया। इस रंगारंग सम्मेलन में पूर्ण उत्साह, जोश, रचनात्मकता, समर्थन और समर्पण से भरे 213 बच्चों और 22 शिक्षकों सहित लगभग 300 मित्रों ने भाग लिया, जो इस आनन्दमय समारोह के साक्षी बने।
बच्चों ने यहाँ आकर खेल खेले और कुछ गीत सीखे। बच्चों की कक्षा के संयोजकों ने अपनी कक्षा और समुदायसमूह में हो रही गतिविधियों के विषय में बताया। सूचना के आधार पर यहाँ इस समय 27 बच्चों की कक्षायें हैं। विभिन्न समूहों के बच्चों ने गीत गाये, नाटक और नृत्य का प्रदर्शन किया और कहानियाँ सुनाई। महत्वपूर्ण गतिविधियों के बारे में कुछ शिक्षकों ने अपने अनुभव सुनाये। दोपहर के भोजन उपरान्त चित्रकला के माध्यम से बच्चों को अपना कौशल और प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। इसमें ध्यान देने योग्य एक बात यह थी कि बच्चों की अधिकतर प्रस्तुति बच्चों की कक्षाओं के दौरान सीखे गये पाठयक्रम पर आधारित थी। प्रत्येक बच्चे को अपने समूह के बारे में पता था और अपने शिक्षक के लिए आदर रखते हैं। यह निश्चित तौर पर पक्का है कि बच्चों की बहाई कक्षाओं ने इस समुदायसमूह के लोगों की संस्कृति को बदल दिया है।
Posted by bhartiya-bahai at 1:34 AM 0 comments



