परमप्रिय विश्व न्याय मन्दिर
बहाउल्लाह के प्रति गहन कृतज्ञता और सभी बहाई उत्सवों के सम्राट के दुनिया भर में मनाये जा रहे समारोहों से प्रेरणा पा कर यह सूचित करते हुए हमें हर्ष हो रहा है कि एशिया में महाद्वीपीय सलाहकार मंडल के प्रतिनिधि सलाहकार ओमिद सिओशानसियान की उपस्थिति में 75 प्रतिनिधि और कोई 60 पर्यवेक्षक, जिनमें 4 सहायक मंडल सदस्य भी शामिल हैं, राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा के पदमुक्त सदस्यों के साथ भारत में प्रभुधर्म की प्रगति पर विचार-विमर्श करने के लिये उपस्थित हुये। विश्व न्याय मन्दिर के 25 मार्च, 2007 के पत्र पर आधारित प्रतिनिधियों के लिये अधिवेशन पूर्व दृढ़ीकरण के बाद अधिवेशन के सभी कार्यवाहियों तथा भारत में अब तक शुरू किये गये 161 सघन विकास कार्यक्रमों की समीक्षा के केन्द्र में रिज़वान 2010 का महत्वपूर्ण संदेश बना रहा। जिन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया उनमें विभिन्न राज्यों में हुई अब तक की प्रगति, क्षेत्रीय सम्मेलनों के बाद से सघन विकास कार्यक्रम वाले समुदायसमूहों में चलायी जा रही गतिविधियों को जारी रखना, विभिन्न संस्थाओं और एजेंसियों के कामों के बीच बेहतर तालमेल बनाये जाने, सब की प्रतिभागिता के जरिये आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, ईश्वर का अधिकार और 2011 में होने वाली भारत की जनगणना तथा इन्हीं विषयों से सम्बन्धित सामान्य अन्य विषयों पर उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा परामर्श किया गया। इन सभी विषयों पर बराबर सलाहकार सिओशानसियान की मार्गदर्शक टिप्पणियों से प्रेरणा मिलती रही।
प्रभुधर्म की जन्मस्थली में रह रहे मित्रों, खासकर यारान को याद किया गया और उनकी सुरक्षा के लिये प्रार्थनायें की गईं। चुनाव के दिन प्रतिनिधिगण तथा अन्य मित्र मशरिकुल अशकार (उपासना मंदिर) में प्रार्थना के लिये गये और तब उन्होंने सन् 2010-2011 के लिये राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा के चुनाव में हिस्सा लिया। निम्नांकित सदस्य चुने गये: डॉ. ए. के. मर्चेंट, श्री पी. के. प्रेमराजन, सुश्री नाज़नीन रौहानी, डॉ. मंगेश तेली, श्रीमती ज़ीना सोराबजी, श्रीमती फरीदा वाहेदी, डॉ. आर. एस. यादव, श्री गणेश शेनाय, डॉ. शिरीन महालती। हम अत्यंत विनम्रता के साथ विश्व न्याय मन्दिर से निवेदन करते हैं कि हमारी कार्यवाहियों को तथा नवनिर्वाचित भारत की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा को निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहे ताकि वर्तमान विश्वव्यापी योजना के विगत चार वर्षों के दौरान जो कुछ भी सीख हासिल हुई है उन अनुभवों के आधार पर इस वर्ष हम ऐसी विजय प्राप्त कर सकें जिसकी कल्पना भी हम अब तक नहीं कर सके हैं।
विभिन्न कार्यवाहियों के बीच एक जो असाधारण संकल्प लिया गया वह था कि बहाई उपासना मन्दिर की स्थापना और जनसामान्य के लिये इसे समर्पित करने की 25वीं वर्षगांठ पर सभी खर्चों के लिये भारतीय बहाई समुदाय द्वारा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जायेगा।
अत्यन्त विनम्र भाव से हम भगवान बहाऊल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि हमें जो जिम्मेदारियाँ दी गई हैं उन्हें पूरा करने में उनका आशीष निरन्तर मिलता है और उसी विनम्र भाव से हम विश्व न्याय मन्दिर से पवित्र समाधियों पर प्रार्थना के लिये निवेदन करते हैं।
Thursday, June 17, 2010
भारत में राष्ट्रीय बहाई अधिवशेन-2010 से विश्व न्याय मन्दिर को भेजा संदेश
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Thursday, May 13, 2010
Miniature Shrine of Bhagwan Bab in Israel

LATRUN, ISRAEL - JULY 23: Visitors stand over a scale model of Haifa's gilded Bahai Temple and gardens at the Mini Israel model park July 23, 2003 in Latrun, Israel. The recently-opened park displays 350 miniature models of buildings and sites from all over the Holy Land on a scale of 1:25. The park contains approximately 30,000 human figures and 20,000 dwarf trees.
Photo: David Silverman/Getty Images
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Thursday, April 15, 2010
Shri Sathya Sai Baba visits "Baha'i" Lotus Temple
In the heart of New Delhi, the bustling capital of India, a lotus-shaped outline has etched itself on the consciousness of the city's inhabitants, capturing their imagination, fuelling their curiosity, and revolutionizing the concept of worship. This is the Bahá'í Mashriqu'l-Adhkar, better known as the "Lotus Temple". With the dawning of every new day, an ever-rising tide of visitors surges to its doorsteps to savour its beauty and bask in its serenely spiritual atmosphere.
On Monday, March 12, 2010, it had a unique visitor, who is verily the goal all worships offered in all places, at all times in the name of God; The unique visitor was Bhagawan Sri Sathya Sai Baba!
As per the reports from Delhi, Bhagawan reached the Bahá'í Temple at around 11:30. He was welcomed by the Director of the Temple along with General Manager and other management officials. Unique feature of this Bahá'í Temple is that like any other Bahá'í Houses of Worship, the Lotus Temple is open to all barring any religious or other distinction, as emphasized in Bahá'í texts. Bahá'ís believe the crucial need facing humanity is to find a unifying vision of the nature and purpose of life and of the future of society. It is a gathering place where people of all religions may worship God without denominational restrictions. The Bahá'í laws also stipulate that the holy scriptures of the Bahá'í Faith and other religions can be read or chanted inside in any language.
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Monday, April 12, 2010
Congratulations to Praveenji
I congratulate Praveenji and pray to Baha'u'llah to give him more strength to serve the faith in India and throught the world. May India Progress more and may we all see the LSAs in every Indian Town.
It is a matter of great happinees and joy for the Indian Baha'i community to see one of its Dashing Counselor on the International Teaching Centre.
Praveenji, May we all witness that day when you are Selected as one of the Member of Universal House of Justice. The First "Hindu Baha'i" at House of Justice.
Best of Luck to you Sir. May you progress more, May Bhagwan Baha'u'llah help you all the Baha'is of India.
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Wednesday, March 3, 2010
राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा की ओर से आपको सम्मान (शरफ) माह की शुभकामनाएँ !
परमप्रिय मित्रों,
भारत के विभिन्न समुदायसमूहों में 138 सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ हो चुके हैं। आइये, हम एक बार फिर सघन विकास कार्यक्रम की आवश्यकता पर प्रकाश डालें। हम यह जानते हैं कि सघन विकास कार्यक्रम एक सीधा, सरल और प्रभावी कार्यक्रम है।
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण केन्द्र द्वारा तैयार प्रपत्र ''बढ़ता संवेग : विकास के प्रति एक सुव्यवस्थित पहल'' में कहा गया है, ''क्षेत्र के सभी निवासियों तक पहुँचने के लिये हम बहाउल्लाह के पावन शब्दों से प्रेरित होते हैं: ''इस युग में स्वर्ग आैर पृथ्वी से भी अधिक विशाल एक द्वार खुला है।'' अपने सामुदायिक जीवन के प्रवेश द्वारों को बाहर की दुनिया के लिये खोलने के गहन प्रयास के लिये साहस और कल्पनात्मकता, दोनों की जरूरत होती है।''
जो मित्र सघन विकास कार्यक्रम में भाग लेते हैं उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि उनका उद्देश्य बहाउल्लाह के प्रकटीकरण को मानवजाति तक पहुँचाना है और प्रभुधर्म के संदेश के माध्यम से उनके आध्यात्मिक और भौतिक विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। इसलिए स्वाभाविक निष्कर्ष यह निकलता है कि जब कोई समुदायसमूह अपना सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ करता है तो वह उसके लिए एक आनन्दमय समारोह का अवसर होता है। जिन समुदायसमूहों में उच्च उत्साह और मजबूत समझ होती है वह सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ करने के लिए तैयार हैं।
पश्चिम बंगाल के एक विशेष समुदायसमूह के उत्साह, उल्लास और सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ करने के दौरान अपनत्व की भावना को प्रकट करने का एक रमणीय उदाहरण है। जिस दिन सघन विकास कार्यक्रम आरम्भ होना था, समुदायसमूह एजेंसियाँ और सहयोगी संस्थायें एक साथ शामियाने (टेन्ट) में एकत्रित हुईं, जहाँ कार्यक्रम आरम्भ होना था। जब स्थानीय बहाइयों के आने का इंतजार कर रहे थे, तभी उन्होंने कुछ दूर से आती ढोल, नारे और शंख ध्वनि सुनी। इस क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए उन्होंने समझा कि यह कोई राजनीतिक जुलूस है। लेकिन जैसे-जैसे आवाज तेज होती गई और करीब आती गई, वैसे-वैसे उन्होंने यह महसूस किया कि सघन विकास कार्यक्रम के शुभारम्भ के अवसर पर इस जुलूस में बहाई सदस्यों के साथ गांव के दूसरे मित्रगण भी शामिल थे। वहाँ एक बड़ा बैनर भी था जिस पर लिखा था ''पहले सघन विकास कार्यक्रम का शुभारम्भ''।
अधिक से अधिक गांव वाले इसमें शामिल हो गए और जल्द ही इन लोगों की संख्या दो सौ हो गई, जो इस आनन्दमय समारोह का हिस्सा बने। अन्तत: जुलूस समाप्त हुआ, सभी शामियाने में आ गए और कार्यक्रम आरम्भ हुआ।
मित्रों ने अपने अनुभव एक दूसरे से बांटे कि किस प्रकार उन्होंने अपनी मूलगतिविधियां आरम्भ की, बच्चों की कक्षा के शिक्षकों ने कक्षा के प्रतिभागी बच्चों में हुए परिवर्तन के बारे में बताया जो उन्होंने कक्षा के परिणामस्वरूप् हासिल किये, किशोरों के समूह के अनुप्रेरकों ने भी इसी प्रकार बताया। बच्चों और किशोरों के अभिभावकों ने उनमें देखे गए परिवर्तन के बारे में बड़े ही गर्व के साथ बताया। कक्षाओं में भाग लेने वाले बच्चों और किशोरों ने एक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। गीत और नाटक के बाद सम्बन्धित संदेश का अध्ययन किया गया।
कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, वहां एक बड़ा सहभोज था जिसमें प्रत्येक आमंत्रित थे। गांव वालों ने, बहाई और जिज्ञासु दोनों ने मिलकर चावल और अन्य सामग्री तैयार की और सबने बड़े चाव से खाया। संस्थानों के उपस्थित सदस्यों में से एक ने कहा कि मित्रों की इस प्रकार की संयुक्त भागीदारी देखकर यह कहना मुश्किल है कि कौन बहाई है और कौन नहीं।
यह समारोह केवल बहाइयों के लिए नहीं था, यह गांव की घटना थी और एक गांव में दो सौ से अधिक लोगों के लिए यह समारोह था। स्पष्ट है कि यह सघन विकास कार्यक्रम केवल बहाइयों के लिए ही नहीं बल्कि प्रत्येक के लिए है।
प्रसन्नता की बात है कि अपनेपन और प्रतिभागिता की समझदारी के कारण वहां पर किसी भी गतिविधि को आगे ले जाने की दिशा में किसी प्रकार का विरोध नहीं किया गया है। यद्यपि, यह स्पष्ट है कि जो ऊपर लिखा गया है वह हर समुदायसमूह में लागू नहीं होगा। हमारे प्रिय धर्मसंरक्षक शोगी एफेंदी का यह एक सुन्दर, वास्तविक उदाहरण है ''ईश्वर का घर सभी के लिए है।''
''बढ़ता संवेग'' प्रपत्र के जरिये हम याद दिलाना चाहते हैं कि हमारे वर्तमान शिक्षण प्रयासों का यह आधार है कि समस्त मानवजाति बहाउल्लाह की ओर उन्मुख हो रही है। खुलेपन के व्यवहार को अपनायें और संकोच की उन रेखाओं को समाप्त करें जो कभी-कभी अनुयायियों के माथे पर उभरती हैं, ताकि निसंकोच विशाल जनसमूह में हम बेझिझक प्रभुधर्म का संदेश दे सकें। राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा का प्रेम आप प्रत्येक के साथ है जो योजना के बचे महीनों में सेवा के काम में जुटे हैं।
बहाई शुभकामनाओं के साथ
भारत के बहाइयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा
महासचिव
नाज़नीन रौहानी
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भग्वद वाणी
''हे ईश्वर ! विषमता और दुराव के जो भी तत्व हैं उन्हें दूर कर दो और हमें वह दो जो एकता और परस्पर प्रेम का कारण बनते हों। हे ईश्वर ! हमारे ऊपर स्वर्गिक सुरभि की वर्षा करो और इस सम्मेलन को स्वर्ग के सम्मेलन में परिणत कर दो। हमें प्रत्येक लाभ आैर प्रत्येक खाद्य पदार्थ दो। हमारे लिये प्रेम का भोजन तयौर करो। हमें ज्ञान का भाजेन दो, हमारे ऊपर स्वर्गिक प्रकाश के भाजेन रूपी आशीष की वर्षा करो।'' -अब्दुल-बहा
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19 दिवसीय सहभोज समाचार पत्र
इस महीने की 7 तारीख को नई दिल्ली स्थित बहाई भवन में एक प्रेस सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसे बड़े पैमाने पर मीडिया कवरेज मिला, जाने-माने अखबारों और टेलिविजन चैनलों ने प्रेस कांफ्रेंस को कवर किया।
हम जब ईरान स्थित बहाई मित्रों पर किये जाने वाले अत्याचार को कम करने और खत्म होने की राह जोह रहे हैं, आइये विश्व न्याय मन्दिर के उस पत्र की कुछ पंक्तियों पर चिन्तन करें जो सर्वोच्च संस्था ने प्रभुधर्म के उस पालने में रह रहे अनुयायियों को जुलाई 2008 में लिखा था। ये पंक्तियां हमारे लिये भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी ईरान के हमारे मुसीबतज़दा बहाइयों के लिये : ''अत:, प्रयास के इस पथ पर उत्साह और दृढ़ता के साथ निरन्तर लगे रहें। जब आप ऐसा करें तब प्रत्येक मानव की अच्छाइयों को देखें, चाहे वह अमीर हो या गरीब, पुरुष हो अथवा स्त्री, वृध्द हो या युवा, शहर का रहने वाला हो या गांव का, कामगार हो या मालिक, बिना नस्ल अथवा धर्म का भेद किये हुए। गरीबों और वंचितों की मदद करें। युवा जनों की जरूरतों पर ध्यान दें और भविष्य के प्रति उन्हें आस्थावान बनायें, ताकि मानवजाति की सेवा के लिये वे अपने आप को तैयार कर सकें।
अपने सहयोगी नागरिकों के समक्ष पूर्वाग्रहों से लड़ने के अपने अनुभव रखने के हर एक
अवसर का लाभ उठायें और प्रेम तथा मैत्री के बंधन को मजबूत करने में उनका सहयोग करें और इस प्रकार अपने देश की प्रगति में तथा इसके लोगों की समृध्दि में अपना योगदान दें।''
बहाई शुभकामनाओं के साथ
भारत के बहाइयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा
नाज़नीन रौहानी
महासचिव
Posted by bhartiya-bahai at 5:27 AM 0 comments




